Sunday, October 3, 2010

प्रतिरोध के सिनेमा का तीसरा लखनऊ फ़िल्म उत्सव


प्रेस विज्ञप्ति

गिरीश तिवाड़ी गिर्दा की याद को समर्पित
तीसरा लखनऊ फिल्म समारोह 8 से 10 अक्टूबर तक

लखनऊ, 3 अक्तूबर। जन संस्कृति मंच (जसम) ने तीसरे लखनऊ फिल्म उत्सव को सुपरिचित कलाकार व गायक गिरीश तिवाड़ी गिर्दा की याद को समर्पित किया है। यह समारोह आगामी 8 अक्टूबर को वाल्मीकि रंगशाला, उत्तर प्रदेश संगीत नाटक अकादमी, गोमती नगर में शाम चार बजे शुरू होगा तथा 10 अक्टूबर तक चलेगा। ‘प्रतिरोध का सिनेमा’ की थीम पर आयोजित इस फिल्म उत्सव का उदघाटन हिन्दी के जाने-माने आलोचक व जसम के राष्ट्रीय महासचिव प्रणय कृष्ण करेंगे तथा ‘जीवन और कला: सदर्भ तेभागा किसान आंदोलन और सोमनाथ होड़’ पर प्रसिद्ध चित्रकार अशोक भौमिक के व्याख्यान से समारोह की शुरुआत होगी।

फीचर फिल्मों की श्रृंखला में गौतम घोष की ‘पार’ तथा बेला नेगी की ‘दाँये या बाँये’ दिखाई जायेंगी। ‘दाँये या बाँये’ में गिरीश तिवाड़ी गिर्दा की यादगार भूमिका है। समारोह में पिछली शताब्दी के क्रान्तिकारी फिल्मकार इल्माज गुने की चर्चित फिल्म ‘सुरू’ का प्रदर्शन होगा, वहीं लखनऊ के दर्शक ईरानी फीचर फिल्म ‘टर्टल्स कैन फ्लाई’ देख सकेंगे। ईरान के प्रसिद्ध फिल्मकार बेहमन गोबादी के निर्देशन में युद्ध की पृष्ठभूमि पर बनी यह फिल्म उस विभीषिका को सामने लाती है जिसमें मनुष्य और मनुष्यता को खत्म किया जा रहा है।

लखनऊ फिल्म समारोह में वृतचित्रों के खण्ड में कबीर पर बनाई शबनम विरमानी की फिल्म ‘हद अनहद’ दिखाई जायेगी। पिछले दिनों देश के विभिन्न हिस्सों में हुए सत्ता के दमन और उसके खिलाफ संघर्ष तथा जनजीवन को गहरे प्रभावित करने वाली घटनाओं और त्रासदी को केन्द्र कर कई वृतचित्र बने जैसे कश्मीर पर संजय काक ने ‘जश्ने आजादी’ बनाई तो ओडीशा के कंधमाल में हुए दंगों पर देबरंजन सारंगी ने ‘फ्राम हिन्दू टू हिन्दूत्व’, बनारस के मणिकर्णिका घाट पर चिता जलाने वाले बच्चों की दशा पर राजेश एस जाला ने ‘चिल्ड्रेन ऑफ पायर’, पुणे महानगर में कचरे की राजनीति व सफाई कर्मचारियों के कर्मजीवन पर अतुल पेठे ने ‘कचरा व्यूह’ जैसे वृतचित्रों का निर्माण किया। ये फिल्में लखनऊ फिल्म समारोह का मुख्य आकर्षण होंगी।

इस फिल्म उत्सव में बच्चों का भी एक सत्र है जिसमें अल्बर्ट लामूरिस्सी की फ्रेंच फिल्म ‘रेड बैलून’ तथा हिन्दी फीचर फिल्म ‘छुटकन की महाभारत’ का आनन्द बच्चे उठा सकेंगे। फिल्मों के अलावा समारोह में संवाद, परिचर्चा तथा गायन के भी कार्यक्रम होंगे। ‘प्रतिपक्ष की भूमिका में सिनेमा’, ‘वृतचित्र: प्रतिरोध के कई रंग’, बदलती दुनिया में सिनेमा’ आदि विषयों पर परिसंवाद में अजय कुमार, अजय सिंह, संजय जोशी, राजेश कुमार, अनिल सिन्हा, भगवान स्वरूप कटियार, मनोज सिंह आदि भाग लेंगे। तरुण भारतीय और के मार्क स्वेअर द्वारा तैयार म्यूजिक वीडियो के गुलदस्ते ‘हम देखेंगे’ का लखनऊ के दर्शक आस्वादन करेंगे। मालविका भी अपना गायन प्रस्तुत करेंगी।


जसम के संयोजक कौशल किशोर ने बताया कि आज दर्शक स्वस्थ मनोरंजन चाहता है और हमारी कोशिश है कि जनता तक ऐसी कला पहुँचाई जाय जो उन्हें सजग, संवेदनशील, जागरुक और जुझारू बनाये। सिनेमा सशक्त व लोकप्रिय कला माध्यम है। यह आन्दोलन और प्रतिरोध का माध्यम बने। आज जनजीवन और सामाजिक संघर्षों से जुड़ी ऐसी कथा फिल्मों और वृतचित्रों का निर्माण हो रहा है जहाँ समाज की कठोर सच्चाइयाँ हैं, जनता का दुख.दर्द, हर्ष.विषाद और उसका संघर्ष व सपने हैं। इसी तरह की फिल्मों को लेकर तीन दिन का यह कार्यक्रम है। फिल्मों का प्रदर्शन निशुल्क और जनता के सहयोग से किया जा रहा है। इस अवसर पर ‘प्रतिपक्ष की भूमिका में सिनेमा’ स्मारिका भी जारी की जायेगी।

प्रेस वार्ता को लेखक व पत्रकार अनिल सिन्हा, नाटककार राजेश कुमार, कवि भगवान स्वरूप कटियार , संस्कृतिकर्मी रवीन्द्र कुमार सिन्हा आदि ने भी सम्बोधित किया।

कौशल किशोर

संयोजक, जन संस्कृति मंच, लखनऊ

कार्यालय : एफ- 3144 , राजाजीपुरम, लखनऊ- 226017

फ़ोन: 09807519227, 09415220306, 09415568836, 09415114685

email : kaushalsil.2008@gmail.com, thegroup.jsm@gmail.com

प्रतिरोध के सिनेमा का तीसरा लखनऊ फिल्म उत्सव

प्रेस विज्ञप्ति

गिरीश तिवाड़ी गिर्दा की याद को समर्पित
तीसरा लखनऊ फिल्म समारोह 8 से 10 अक्टूबर तक

लखनऊ, 3 अक्तूबर। जन संस्कृति मंच (जसम) ने तीसरे लखनऊ फिल्म उत्सव को सुपरिचित कलाकार व गायक गिरीश तिवाड़ी गिर्दा की याद को समर्पित किया है। यह समारोह आगामी 8 अक्टूबर को वाल्मीकि रंगशाला, उत्तर प्रदेश संगीत नाटक अकादमी, गोमती नगर में शाम चार बजे शुरू होगा तथा 10 अक्टूबर तक चलेगा। ‘प्रतिरोध का सिनेमा’ की थीम पर आयोजित इस फिल्म उत्सव का उदघाटन हिन्दी के जाने-माने आलोचक व जसम के राष्ट्रीय महासचिव प्रणय कृष्ण करेंगे तथा ‘जीवन और कला: सदर्भ तेभागा किसान आंदोलन और सोमनाथ होड़’ पर प्रसिद्ध चित्रकार अशोक भौमिक के व्याख्यान से समारोह की शुरुआत होगी।

फीचर फिल्मों की श्रृंखला में गौतम घोष की ‘पार’ तथा बेला नेगी की ‘दाँये या बाँये’ दिखाई जायेंगी। ‘दाँये या बाँये’ में गिरीश तिवाड़ी गिर्दा की यादगार भूमिका है। समारोह में पिछली शताब्दी के क्रान्तिकारी फिल्मकार इल्माज गुने की चर्चित फिल्म ‘सुरू’ का प्रदर्शन होगा, वहीं लखनऊ के दर्शक ईरानी फीचर फिल्म ‘टर्टल्स कैन फ्लाई’ देख सकेंगे। ईरान के प्रसिद्ध फिल्मकार बेहमन गोबादी के निर्देशन में युद्ध की पृष्ठभूमि पर बनी यह फिल्म उस विभीषिका को सामने लाती है जिसमें मनुष्य और मनुष्यता को खत्म किया जा रहा है।

लखनऊ फिल्म समारोह में वृतचित्रों के खण्ड में कबीर पर बनाई शबनम विरमानी की फिल्म ‘हद अनहद’ दिखाई जायेगी। पिछले दिनों देश के विभिन्न हिस्सों में हुए सत्ता के दमन और उसके खिलाफ संघर्ष तथा जनजीवन को गहरे प्रभावित करने वाली घटनाओं और त्रासदी को केन्द्र कर कई वृतचित्र बने जैसे कश्मीर पर संजय काक ने ‘जश्ने आजादी’ बनाई तो ओडीशा के कंधमाल में हुए दंगों पर देबरंजन सारंगी ने ‘फ्राम हिन्दू टू हिन्दूत्व’, बनारस के मणिकर्णिका घाट पर चिता जलाने वाले बच्चों की दशा पर राजेश एस जाला ने ‘चिल्ड्रेन ऑफ पायर’, पुणे महानगर में कचरे की राजनीति व सफाई कर्मचारियों के कर्मजीवन पर अतुल पेठे ने ‘कचरा व्यूह’ जैसे वृतचित्रों का निर्माण किया। ये फिल्में लखनऊ फिल्म समारोह का मुख्य आकर्षण होंगी।

इस फिल्म उत्सव में बच्चों का भी एक सत्र है जिसमें अल्बर्ट लामूरिस्सी की फ्रेंच फिल्म ‘रेड बैलून’ तथा हिन्दी फीचर फिल्म ‘छुटकन की महाभारत’ का आनन्द बच्चे उठा सकेंगे। फिल्मों के अलावा समारोह में संवाद, परिचर्चा तथा गायन के भी कार्यक्रम होंगे। ‘प्रतिपक्ष की भूमिका में सिनेमा’, ‘वृतचित्र: प्रतिरोध के कई रंग’, बदलती दुनिया में सिनेमा’ आदि विषयों पर परिसंवाद में अजय कुमार, अजय सिंह, संजय जोशी, राजेश कुमार, अनिल सिन्हा, भगवान स्वरूप कटियार, मनोज सिंह आदि भाग लेंगे। तरुण भारतीय और के मार्क स्वेअर द्वारा तैयार म्यूजिक वीडियो के गुलदस्ते ‘हम देखेंगे’ का लखनऊ के दर्शक आस्वादन करेंगे। मालविका भी अपना गायन प्रस्तुत करेंगी।


जसम के संयोजक कौशल किशोर ने बताया कि आज दर्शक स्वस्थ मनोरंजन चाहता है और हमारी कोशिश है कि जनता तक ऐसी कला पहुँचाई जाय जो उन्हें सजग, संवेदनशील, जागरुक और जुझारू बनाये। सिनेमा सशक्त व लोकप्रिय कला माध्यम है। यह आन्दोलन और प्रतिरोध का माध्यम बने। आज जनजीवन और सामाजिक संघर्षों से जुड़ी ऐसी कथा फिल्मों और वृतचित्रों का निर्माण हो रहा है जहाँ समाज की कठोर सच्चाइयाँ हैं, जनता का दुख.दर्द, हर्ष.विषाद और उसका संघर्ष व सपने हैं। इसी तरह की फिल्मों को लेकर तीन दिन का यह कार्यक्रम है। फिल्मों का प्रदर्शन निशुल्क और जनता के सहयोग से किया जा रहा है। इस अवसर पर ‘प्रतिपक्ष की भूमिका में सिनेमा’ स्मारिका भी जारी की जायेगी।

प्रेस वार्ता को लेखक व पत्रकार अनिल सिन्हा, नाटककार राजेश कुमार, कवि भगवान स्वरूप कटिया , संस्कृतिकर्मी रवीन्द्र कुमार सिन्हा आदि ने भी सम्बोधित किया।

कौशल किशोर

संयोजक
जन संस्कृति मंच, लखनऊ

e mail : kaushalsil.2008@gmail.com

प्रतिरोध के सिनेमा का तीसरा लखनऊ फ़िल्म समारोह

प्रेस वार्ता में जारी विज्ञप्ति

गिरीश तिवाड़ी गिर्दा की याद को समर्पित
तीसरा लखनऊ फिल्म समारोह 8 से 10 अक्टूबर तक

लखनऊ, 3 अक्तूबर। जन संस्कृति मंच (जसम) ने तीसरे लखनऊ फिल्म उत्सव को सुपरिचित कलाकार व गायक गिरीश तिवाड़ी गिर्दा की याद को समर्पित किया है। यह समारोह आगामी 8 अक्टूबर को वाल्मीकि रंगशाला, उत्तर प्रदेश संगीत नाटक अकादमी, गोमती नगर में शाम चार बजे शुरू होगा तथा 10 अक्टूबर तक चलेगा। ‘प्रतिरोध का सिनेमा’ की थीम पर आयोजित इस फिल्म उत्सव का उदघाटन हिन्दी के जाने-माने आलोचक व जसम के राष्ट्रीय महामंत्री प्रणय कृष्ण करेंगे तथा ‘जीवन और कला: सदर्भ तेभागा किसान आंदोलन और सोमनाथ होड़’ पर प्रसिद्ध चित्रकार अशोक भौमिक के व्याख्यान से समारोह की शुरुआत होगी।

फीचर फिल्मों की श्रृंखला में गौतम घोष की ‘पार’ तथा बेला नेगी की ‘दाँये या बाँये’ दिखाई जायेंगी। ‘दाँये या बाँये’ में गिरीश तिवाड़ी गिर्दा की यादगार भूमिका है। समारोह में पिछली शताब्दी के क्रान्तिकारी फिल्मकार इल्माज गुने की चर्चित फिल्म ‘सुरू’ का प्रदर्शन होगा, वहीं लखनऊ के दर्शक ईरानी फीचर फिल्म ‘टर्टल्स कैन फ्लाई’ देख सकेंगे। ईरान के प्रसिद्ध फिल्मकार बेहमन गोबादी के निर्देशन में युद्ध की पृष्ठभूमि पर बनी यह फिल्म उस विभीषिका को सामने लाती है जिसमें मनुष्य और मनुष्यता को खत्म किया जा रहा है।

लखनऊ फिल्म समारोह में वृतचित्रों के खण्ड में कबीर पर बनाई शबनम विरमानी की फिल्म ‘हद अनहद’ दिखाई जायेगी। पिछले दिनों देश के विभिन्न हिस्सों में हुए सŸाा के दमन और उसके खिलाफ संघर्ष तथा जनजीवन को गहरे प्रभावित करने वाली घटनाओं और त्रासदी को केन्द्र कर कई वृतचित्र बने जैसे कश्मीर पर संजय काक ने ‘जश्ने आजादी’ बनाई तो ओडीशा के कंधमाल में हुए दंगों पर देबरंजन सारंगी ने ‘फ्राम हिन्दू टू हिन्दूत्व’, बनारस के मणकर्णिका घाट पर चिता जलाने वाले बच्चों की दशा पर राजेश एस जाला ने ‘चिल्ड्रेन ऑफ पायर’, पुणे महानगर में कचरे की राजनीति व सफाई कर्मचारियों के कर्मजीवन पर अतुल पेठे ने ‘कचरा व्यूह’ जैसे वृतचित्रों का निर्माण किया। ये फिल्में लखनऊ फिल्म समारोह का मुख्य आकर्षण होंगी।

इस फिल्म उत्सव में बच्चांे का भी एक सत्र है जिसमें अल्बर्ट लामूरिस्सी की फ्रेंच फिल्म ‘रेड बैलून’ तथा हिन्दी फीचर फिल्म ‘छुटकन की महाभारत’ का आनन्द बच्चे उठा सकेंगे। फिल्मों के अलावा समारोह में संवाद, परिचर्चा तथा गायन के भी कार्यक्रम होंगे। ‘प्रतिपक्ष की भूमिका में सिनेमा’, ‘वृतचित्र: प्रतिरोध के कई रंग’, बदलती दुनिया में सिनेमा’ आदि विषयों पर परिसंवाद में अजय कुमार, अजय सिंह, संजय जोशी, राजेश कुमार, अनिल सिन्हा, भगवान स्वरूप कटियार, मनोज सिंह आदि भाग लेंगे। तरुण भारतीय और के मार्क स्वीअर की म्यूजिक वीडियो ‘हम देखेंगे’ का लखनऊ के दर्शक आस्वादन करेंगे। मालविका भी अपना गायन प्रस्तुत करेंगी।


जसम के संयोजक कौशल किशोर ने बताया कि आज दर्शक स्वस्थ मनोरंजन चाहता है और हमारी कोशिश है कि जनता तक ऐसी कला पहुँचाई जाय जो उन्हें सजग, संवेदनशील, जागरुक और जुझारू बनाये। सिनेमा सशक्त व लोकप्रिय कला माध्यम है। यह आन्दोलन और प्रतिरोध का माध्यम बने। आज जनजीवन और सामाजिक संघर्षों से जुड़ी ऐसी कथा फिल्मों और वृतचित्रों का निर्माण हो रहा है जहाँ समाज की कठोर सच्चाइयाँ हैं, जनता का दुख.दर्द, हर्ष.विषाद और उसका संघर्ष व सपने हैं। इसी तरह की फिल्मों को लेकर तीन दिन का यह कार्यक्रम है। फिल्मों का प्रदर्शन निशुल्क और जनता के सहयोग से किया जा रहा है। इस अवसर पर ‘प्रतिपक्ष की भूमिका में सिनेमा’ स्मारिका भी जारी की जायेगी।

प्रेस वार्ता को लेखक व पत्रकार अनिल सिन्हा, नाटककार राजेश कुमार, कव भगवान स्वरूप कटयार, संस्कृतिकर्मी रवीन्द्र कुमार सिन्हा आदि ने भी सम्बोधित किया।

कौशल किशोर

संयोजक
जन संस्कृति मंच, लखनऊ

तीसरा लखनऊ फिल्म समारोह

गिरीश तिवाड़ी गिर्दा की याद को समर्पित
तीसरा लखनऊ फिल्म समारोह 8 से 10 अक्टूबर तक

लखनऊ, 3 अक्तूबर। जन संस्कृति मंच (जसम) ने तीसरे लखनऊ फिल्म उत्सव को सुपरिचित कलाकार व गायक गिरीश तिवाड़ी गिर्दा की याद को समर्पित किया है। यह समारोह आगामी 8 अक्टूबर को वाल्मीकि रंगशाला, प्रदेश संगीत नाटक अकादमी, गोमती नगर में शाम चार बजे शुरू होगा तथा 10 अक्टूबर तक चलेगा। ‘प्रतिरोध का सिनेमा’ की थीम पर आयोजित इस फिल्म उत्सव का उदघाटन हिन्दी के जाने-माने आलोचक व जसम के राष्ट्रीय महामंत्री प्रणय कृष्ण करेंगे तथा ‘जीवन और कला: सदर्भ तेभागा किसान आंदोलन और सोमनाथ होड़’ पर प्रसिद्ध चित्रकार अशोक भौमिक के व्याख्यान से समारोह की शुरुआत होगी।

फीचर फिल्मों की श्रृंखला में गौतम घोष की ‘पार’ तथा बेला नेगी की ‘दाँये या बाँये’ दिखाई जायेंगी। ‘दाँये या बाँये’ में गिरीश तिवाड़ी गिर्दा की यादगार भूमिका है। समारोह में पिछली शताब्दी के क्रान्तिकारी फिल्मकार इल्माज गुने की चर्चित फिल्म ‘सुरू’ का प्रदर्शन होगा, वहीं लखनऊ के दर्शक ईरानी फीचर फिल्म ‘टर्टल्स कैन फ्लाई’ देख सकेंगे। ईरान के प्रसिद्ध फिल्मकार बेहमन गोबादी के निर्देशन में युद्ध की पृष्ठभूमि पर बनी यह फिल्म उस विभीषिका को सामने लाती है जिसमें मनुष्य और मनुष्यता को खत्म किया जा रहा है।

लखनऊ फिल्म समारोह में वृतचित्रों के खण्ड में कबीर पर बनाई शबनम विरमानी की फिल्म ‘हद अनहद’ दिखाई जायेगी। पिछले दिनों देश के विभिन्न हिस्सों में हुए सŸाा के दमन और उसके खिलाफ संघर्ष तथा जनजीवन को गहरे प्रभावित करने वाली घटनाओं और त्रासदी को केन्द्र कर कई वृतचित्र बने जैसे कश्मीर पर संजय काक ने ‘जश्ने आजादी’ बनाई तो ओडीशा के कंधमाल में हुए दंगों पर देबरंजन सारंगी ने ‘फ्राम हिन्दू टू हिन्दूत्व’, बनारस के मणकर्णिका घाट पर चिता जलाने वाले बच्चों की दशा पर राजेश एस जाला ने ‘चिल्ड्रेन ऑफ पायर’, पुणे महानगर में कचरे की राजनीति व सफाई कर्मचारियों के कर्मजीवन पर अतुल पेठे ने ‘कचरा व्यूह’ जैसे वृतचित्रों का निर्माण किया। ये फिल्में लखनऊ फिल्म समारोह का मुख्य आकर्षण होंगी।

इस फिल्म उत्सव में बच्चांे का भी एक सत्र है जिसमें अल्बर्ट लामूरिस्सी की फ्रेंच फिल्म ‘रेड बैलून’ तथा हिन्दी फीचर फिल्म ‘छुटकन की महाभारत’ का आनन्द बच्चे उठा सकेंगे। फिल्मों के अलावा समारोह में संवाद, परिचर्चा तथा गायन के भी कार्यक्रम होंगे। ‘प्रतिपक्ष की भूमिका में सिनेमा’, ‘वृतचित्र: प्रतिरोध के कई रंग’, बदलती दुनिया में सिनेमा’ आदि विषयों पर परिसंवाद में अजय कुमार, अजय सिंह, संजय जोशी, राजेश कुमार, अनिल सिन्हा, भगवान स्वरूप कटियार, मनोज सिंह आदि भाग लेंगे। तरुण भारतीय और के मार्क स्वीअर की म्यूजिक वीडियो ‘हम देखेंगे’ का लखनऊ के दर्शक आस्वादन करेंगे। मालविका भी अपना गायन प्रस्तुत करेंगी।


जसम के संयोजक कौशल किशोर ने बताया कि आज दर्शक स्वस्थ मनोरंजन चाहता है और हमारी कोशिश है कि जनता तक ऐसी कला पहुँचाई जाय जो उन्हें सजग, संवेदनशील, जागरुक और जुझारू बनाये। सिनेमा सशक्त व लोकप्रिय कला माध्यम है। यह आन्दोलन और प्रतिरोध का माध्यम बने। आज जनजीवन और सामाजिक संघर्षों से जुड़ी ऐसी कथा फिल्मों और वृतचित्रों का निर्माण हो रहा है जहाँ समाज की कठोर सच्चाइयाँ हैं, जनता का दुख.दर्द, हर्ष.विषाद और उसका संघर्ष व सपने हैं। इसी तरह की फिल्मों को लेकर तीन दिन का यह कार्यक्रम है। फिल्मों का प्रदर्शन निशुल्क और जनता के सहयोग से किया जा रहा है। इस अवसर पर ‘प्रतिपक्ष की भूमिका में सिनेमा’ स्मारिका भी जारी की जायेगी।

प्रेस वार्ता को लेखक व पत्रकार अनिल सिन्हा, नाटककार राजेश कुमार, कव भगवान स्वरूप कटयार, संस्कृतिकर्मी रवीन्द्र कुमार सिन्हा आदि ने भी सम्बोधित किया।

कौशल किशोर

संयोजक
जन संस्कृति मंच, लखनऊ

Wednesday, September 29, 2010

दूसरे नैनीताल फ़िल्म फेस्टिवल की नयी तारीखें

प्रिय मित्रों,
पिछले दिनों उत्तराखंड में लगातार बारिश और भूस्खलन के कारण जान माल का बहुत नुकसान हुआ है। इसे देखते हुए हमने अपना फ़िल्म उत्सव एक महीने टालकर अब 29 से 31 अकतूबर करने का निश्चय किया है। जल्द ही इस ब्लॉग पर फ़िल्म फेस्टिवल का पूरा शिड्यूल प्रकाशित किया जाएगा। इच्छुक सिने प्रेमी दर्शकों से अनुरोध है कि नैनीताल पहुंचकर प्रतिरोध के सिनेमा अभियान को सफल बनाएँ। इस समय नैनीताल में टूरिस्टों का खासा जमावड़ा रहता है इसलिए अपने रहने का इंतज़ाम एडवांस में कर लें।

शुभकामनाओं सहित,

ज़हूर आलम
संयोजक, दूसरा नैनीताल फ़िल्म फेस्टिवल
09412983164
yugmanch.nainital@gmail.com

संजय जोशी
निदेशक, दूसरा नैनीताल फ़िल्म फेस्टिवल
09811577426
thegroup.jsm@gmail.com

Monday, September 20, 2010

दूसरा नैनीताल फिल्म फेस्टिवल भारी वर्षा के कारण sthagit

प्रतिरोध का सिनेमा दूसरा नैनीताल फिल्म उत्सव स्थगित
नैनीताल : पिछले एक पखवाड़े से उत्तराखंड में भारी वर्षा के कारण हुए जान-माल के नुकसान के चलते नैनीताल में 24 सितंबर से होने वाले दूसरे नैनीताल फिल्म फेस्टिवल को अगली घोषणा तक के लिए स्थगित कर दिया गया है। जहूर आलम, अध्यक्ष युगमंच और संजय जोशी, संयोजक, द ग्रुप, जन संस्कृति मंच ने बताया कि उत्तराखंड में भारी वर्षा के कारण जान-माल का काफी नुकसान हुआ है। इस कारण २४ सितम्बर से २६ सितम्बर तक होने वाले दूसरे नैनीताल फिल्म फेस्टिवल को अगली घोषणा तक के लिए स्थगित स्थगित कर दिया गया है। अगली तारीख की घोषणा शीघ्र कर दी जाएगी .
युगमंच और द ग्रुप, जन संस्कृति मंच इस त्रासदी में मारे गए लोगों के प्रति अपनी हार्दिक संवेदना प्रकट करता है.

ज़हूर आलम
अध्यक्ष, युगमंच, नैनीताल
09412983164
संजय जोशी
संयोजक, द ग्रुप, जन संस्कृति मंच
0981577426

Tuesday, August 31, 2010

दूसरा नैनीताल फ़िल्म फेस्टिवल

प्रिय मित्रों ,
दूसरे नैनीताल फिल्म फेस्टिवल संबंधी सूचना प्रकाशित कर रहा हूँ. मेहरबानी करके इसे विभिन्न जगहों पर प्रकाशित करवाने का प्रयास करें. नैनीताल में सितम्बर के महीने में मौसम सुहावना रहता है लेकिन फिर भी गरम कपड़ों की जरुरत पड़ सकती है. सस्ते और सुन्दर होटल के लिए आप फेस्टिवल के संयोजक ज़हूर आलम से बात कर सकते हैं या खुद भी internet के जरिये अच्छे विकल्प तलाश सकते हैं. फेस्टिवल 24 सितम्बर को दुपहर में 3.30 बजे शुरू होगा. उस दिन वसुधा जोशी की अल्मोड़े के दशहरे पर केन्द्रित डाक्यूमेंटरी अल्मोडियाना और बेला नेगी की पहाड़ के जीवन पर आधारित फीचर फ़िल्म दायें या बाएं का प्रदर्शन होगा. इस फ़िल्म में हाल ही में दिवंगत गिर्दा का भी जीवंत अभिनय है. अगले दोनों दिन यानि 25 और 26 सितम्बर को फेस्टिवल सुबह 10.30 बजे से शुरू होकर रात 9 बजे तक चलेगा . आपके सहयोग की उम्मीद में.




दूसरा नैनीताल फिल्म फेस्टिवल
२४ से २६ सितम्बर, २०१०
शैले हाल, नैनीताल क्लब, मल्लीताल, नैनीताल, उत्तराखंड

गिर्दा और निर्मल पांडे की याद में
युगमंच और द ग्रुप, जन संस्कृति मंच द्वारा आयोजित
प्रमुख आकर्षण :
फीचर फिल्म:

दायें या बायें (निर्देशिका: बेला नेगी), खरगोश(निर्देशक: परेश कामदार), छुटकन की महाभारत (निर्देशक: संकल्प मेश्राम)
डाक्यूमेंटरी:
वसुधा जोशी की फिल्मों पर ख़ास फोकस ( फिल्में : अल्मोडियाना, फॉर माया, वायसेस फ्राम बलियापाल)
जश्ने आज़ादी (निर्देशक: संजय काक), कित्ते मिल वे माह़ी (निर्देशक: अजय भारद्वाज ), फ्राम हिन्दु टू हिन्दुत्व (निर्देशक: देबरंजन सारंगी ), आई वंडर ( निर्देशिका: अनुपमा श्रीनिवासन ), अँधेरे से पहले (निर्देशक: अजय टी जी ) और मेकर्स ऑफ़ दुर्गा (निर्देशक: राजीव कुमार).

अन्य आकर्षण :
प्रयाग जोशी और बी मोहन नेगी का सम्मान, बी मोहन नेगी के चित्रों और कविता पोस्टरों की प्रदर्शनी, अफ्रीका के जन जीवन पर पत्रकार राजेश जोशी का व्याख्यान -प्रदर्शन , युगमंच के बाल कलाकारों द्वारा लघु नाटक, तरुण भारतीय और के मार्क स्वेअर द्वारा संयोजित म्यूजिक विडियो का गुलदस्ता, लघु फिल्मों का पैकेज,फिल्मकारों के साथ सीधा संवाद और फैज़, शमशेर बहादुर सिंह, नागार्जुन, केदारनाथ अग्रवाल, अज्ञेय और गिर्दा की कविताओं के पोस्टरों का लोकार्पण .

ख़ास बात: यह आयोजन पूरी तरह निशुल्क है . फिल्म फेस्टिवल में प्रवेश के लिए किसी भी तरह के औपचारिक आमंत्रण की जरुरत नहीं है.

संपर्क: ज़हूर आलम , संयोजक , दूसरा नैनीताल फिल्म फेस्टिवल
इन्तखाब, मल्लीबाज़ार, मल्लीताल, नैनीताल, उत्तराखंड
फ़ोन: 09412983164, 05942- 237674
संजय जोशी, फेस्टिवल निदेशक, दूसरा नैनीताल फिल्म फेस्टिवल
C-303 जनसत्ता अपार्टमेंट्स , सेक्टर 9, वसुंधरा
गाज़ियाबाद , उत्तर प्रदेश -201012
फ़ोन: 09811577426, 0120-4108090